आईएनडीआरपी प्रक्रिया नियम
पोस्ट: 28 जून 2005
1. परिभाषाएं
इन नियमों में:
मध्यस्थ से अभिप्राय उन विशेषज्ञों से है जो कंप्यूटर और / अथवा कानूनों की विशेषज्ञता रखते हैं, अत्यधिक प्रोफेशनल (व्यावसायिक) होते हैं और डोमेन नाम विवादों में स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय देने में सक्षम होते हैं।
शिकायत से तात्पर्य इन प्रक्रिया नियमों के पैरा 3 में संदर्भित शिकायत से है।
शिकायतकर्ता से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसकी रजिस्ट्रेंट के विरुद्ध शिकायत है।
.इन रजिस्ट्री का प्रयोग इस नीति और इसके तहत रचित नियमों में जहां पर भी हुआ है उससे तात्पर्य नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (निक्सी) से है जो कि भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के अंतर्गत एक पंजीकृत कंपनी है।
विवाद निपटान नीति से तात्पर्य है .इन डोमेन नाम का पंजीकृत धारक जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है।
प्रतिवादी से तात्पर्य है .इन डोमेन नाम का पंजीकृत धारक जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है।
प्रतिक्रिया से तात्पर्य इन प्रक्रिया नियमों के पैरा 5 में संदर्भित प्रतिक्रिया से है।
2. पत्राचार
(क) प्रतिवादी को शिकायत अग्रेषित करते हुए, .इन रजिस्ट्री द्वारा प्रतिवादी को शिकायत का नोटिस भेजने हेतु उपलब्ध समुचित साधनों का उपयोग किया जाए। नोटिस भेजने अथवा ऐसा करने के लिए निम्न उपायों का उपयोग करते हुए इस उत्तरदायित्व का निर्वहन किया जाए :
(i) डोमेन नाम के पंजीकरण डाटा में दर्शाए गए सभी पोस्टल मेल और प्रतिकृति पतों पर www.registry.in में .इन रजिस्ट्री के हू इज (WHOIS) डाटाबेस के माध्यम से शिकायत भेजना; और
(ii) ई-मेल से इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म (उस फॉर्म में यथा उपलब्ध संलग्नक शामिल करना) में निम्न को शिकायत भेजना :
(क) www.registry.in में .इन रजिस्ट्री के हू इज (WHO IS) फंक्शन के माध्यम से डोमेन नाम के पंजीकरण डाटा में दर्शाए गए ई-मेल पतों पर; और
(ख) पोस्टमास्टर @ (विवादित डोमेन का नाम)
(iii) शिकायत को प्रतिवादी द्वारा .इन रजिस्ट्री को लिखित में अधिसूचित किसी भी पते पर (ई मेल सहित) जिस पर वह प्राथमिकता देता है और, यथासंभव, शिकायतकर्ता द्वारा पैरा 3 (ख) (v) के अंतर्गत .इन रजिस्ट्री को उपलब्ध कराए गए अन्य सभी पतों पर भेजी जाए।
(ख) शिकायत की सूचना भेजने के सिवाय जैसा कि पैरा 2 (क) में प्रावधान किया गया है, इन प्रक्रिया नियमों के अंतर्गत शिकायतकर्ता अथवा प्रतिवादी को कोई भी लिखित सूचना
(i) प्रतिकृति संप्रेषण (ट्रांसमिशन) द्वारा दी जाए और संप्रेषण की पुष्टि की जाए; अथवा
(ii) पंजीकृत डाक और / अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा भेजी जाए।
(ग) सभी पत्राचार इन प्रक्रिया नियमों के पैरा 10 में निर्दिष्ट भाषा में किए जाएं।
(घ) कोई भी पक्ष अपना संपर्क-पता .इन रजिस्ट्री में अधिसूचित कर अद्यतन करा सकता है।
(ङ) सिवाय इसके जैसा कि इन प्रक्रिया नियमों में प्रावधान है अथवा मध्यस्थ द्वारा निर्णय किया गया है, इन प्रक्रिया नियमों के अंतर्गत सभी पत्राचार किए गए माने जाएंगे :
(i) यदि प्रतिकृति संप्रेषण द्वारा संप्रेषण की पुष्टि की दर्शाई गई तिथि को परिदत्त किए गए; अथवा
(ii) यदि पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा पावती रसीद पर चिह्निनत तिथि को अथवा डिस्पैच की तिथि से तीसरे दिन परिदत्त किए गए; अथवा
(iii) यदि इंटरनेट द्वारा किया गया है तो उस तिथि को जिसको संप्रेषण किया गया था बशर्ते कि संप्रेषण की तिथि सत्यापन - योग्य हो।
(च) सिवाय इसके जैसा कि इन प्रक्रिया नियमों में दिया गया है, पत्राचार करने पर आरंभ होने वाली समय - अवधियां जिनकी गणना इन प्रक्रिया नियमों के अंतर्गत की जाती है, उक्त पैरा 2 (ड.) के अनुसार उस पूर्व तिथि को ही आरंभ हो जाएंगी जिस दिन पत्राचार किया जाना मान्य हो।
(छ) कोई भी पत्राचार जो
(i) मध्यस्थ द्वारा किसी पक्ष के साथ किया गया हो, को प्रति .इन रजिस्ट्री और अन्य पक्ष को भेजी जाए;
(ii) .इन रजिस्ट्री द्वारा किसी पक्ष के साथ किया गया हो, की प्रति अन्य पक्ष और मध्यस्थ को भेजी जाए; और
(iii) किसी पक्ष द्वारा किया गया हो, की प्रति अन्य पक्ष, मध्यस्थ और .इन रजिस्ट्री को भेजी जाए।
(ज) पत्र भेजने वाले का दायित्व होगा कि वह भेजे जा रहे तथ्यों और विभवों का रिकॉर्ड रखे जो कि प्रभावित पक्षों द्वारा निरीक्षण हेतु तथा रिपोर्टिंग प्रयोजनों हेतु उपलब्ध होनी चाहिए।
(झ) यदि प्रेषक द्वारा पत्र भेजा जाता है और उसे पत्र अ-परिदत्त होने की सूचना प्राप्त होती है तो प्रेषक तत्काल पत्र परिदत्त न होने तथा तत्संबंधी कारण, यदि कोई हो तो, की सूचना मध्यस्थ, ¬.इन रजिस्ट्री और संबंधित पक्षों को देगा। साथ ही पत्राचार से संबंधित कार्यवाही और कोई प्रतिक्रिया मध्यस्थ के निर्देशानुसार होनी चाहिए अथवा यदि किसी मध्यस्थ की नियुक्ति अभी नहीं हुई है, तो .इन रजिस्ट्री के निर्देशानुसार।
3. शिकायत
(क) कोई व्यक्ति या कंपनी विवाद निपटान नीति और इन प्रक्रिया नियमों के अनुसार .इन रजिस्ट्री में शिकायत दर्ज कर माध्यस्थम कार्यवाही आरंभ कर सकता है। शिकायत वाले लिफाफे पर दाएं कोने पर स्पष्ट रूप से? .इन डोमेन नाम विवाद शिकायत? लिखा होना चाहिए।
शिकायत निम्न पते पर भेजी जाए :
.इन रजिस्ट्री
द्वारा निक्सी (नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया)
पंजीकृत कार्यालय : इनक्यूबे बिजनेस सेंटर, पांचवां तल
18, नेहरु प्लेस
नई दिल्ली 110019
भारत
दूरभाष : + 91 11 3061 4624 / 4625
फैक्स : + 91 11 3061 4629
ई-मेल : registry@nixi.in
अथवा रजिस्ट्री? की वेबसाइट पर समय-समय पर प्रकाशित किए जाने वाले किसी अन्य पते पर।
(ख) शिकायत तथा संलग्न अनुबंध की हार्ड कॉपी (मुद्रित रूप में) भेजी जाए और यदि संभव हो तो इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में भी भेजी जाए तथा इसमें निम्न को सम्मिलित किया जाए :
(i) अनुरोध कि शिकायत को माध्यस्थम हेतु विवाद निपटान नीति तथा इसके तहत रचित नियमों के अनुसार भेजा जाए;
(ii) शिकायतकर्ता तथा माध्यस्थम कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कार्रवाई करने हेतु प्राधिकृत किसी प्रतिनिधि का नाम, डाक और ई-मेल पते और टेलीफोन और प्रतिकृति नम्बर भी दिया जाए और पत्राचार की प्राथमिकता विधि अर्थात ई-मेल, डाक अथवा प्रतिकृति द्वारा को भी विनिर्दिष्ट किया जाए।
(iii) प्रतिवादी का नाम तथा किसी पूर्व-शिकायत बातचीत के आधार पर संपर्क सूचना सहित प्रतिवादी से कैसे संपर्क किया जाए इसके संबंध में शिकायतकर्ता को ज्ञात सभी जानकारी (डाक और ई-मेल पतों और टेलीफोन व प्रतिकृति नम्बरों सहित) उपलब्ध कराई जाए ताकि .इन रजिस्ट्री प्रतिवादी को शिकायत भेज सके, जैसा कि उक्त पैरा 2(क) में उल्लेख किया गया है;
(iv) उस डोमेन नाम को विनिर्दिष्ट करें जो शिकायत का विषय है;
(v) उस ट्रेडमार्क (ट्रेडमार्कों) और सेवा चिह्नन (चिह्ननों) को विनिर्दिष्ट करें जिन पर शिकायत आधारित है और प्रत्येक चिह्नन हेतु उन माल अथवा सेवाओं का उल्लेख करें, यदि कोई हो, जिसके लिए चिह्नन का उपयोग किया जाता है। शिकायतकर्ता, शिकायत करने के दौरान अलग से उन अन्य माल एवं सेवाओं का ब्योरा दे सकता है जिनके साथ भविष्य में चिह्नन का उपयोग आशयित है।
(vi) डोमेन नाम विवाद निपटान नीति के अनुसार विशेष तौर पर निम्न सहित बताएं कि शिकायत करने का आधार क्या है,
(1) प्रश्नाधीन डोमेन नाम उन ट्रेडमार्क अथवा सेवा चिह्नन से किस प्रकार समान अथवा भ्रामक रूप से समान है जिन पर शिकायतकर्ता का अधिकार है; और
(2) डोमेन नाम जो कि शिकायत का विषय है के संबंध में इस बात पर क्यों विचार किया जाए कि इसमें प्रतिवादी का कोई अधिकार नहीं है अथवा वैध हित है; और
(3) इस बात पर क्यों विचार किया जाए कि प्रश्नाधीन डोमेन नाम पंजीकृत है और इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
(vii) विवाद निपटान के अनुसार वांछित उपचारों को विनिर्दिष्ट करें;
(viii) उन अन्य कानूनी कार्यवाहियों की पहचान करें जिन्हें उस डोमेन नाम के संबंध में आरंभ या समाप्त किया गया हो अथवा जो उससे संबंधित हैं, जो कि शिकायत का विषय है।
(ix) निम्न कथन के साथ समाप्त करें और तत्पश्चात शिकायतकर्ता या प्राधिकृत प्रतिनिधि हस्ताक्षर करे :
“शिकायतकर्ता, शिकायत दर्ज कर, डोमेन नाम जो कि शिकायत का विषय है, के संबंध में माध्यस्थम और सुलह अधिनियम, 1996, .इन रजिस्ट्री की .इन डोमेन नाम विवाद निपटान नीति; प्रक्रिया नियमों तथा किन्हीं उप-कानूनों, उसके अंतर्गत रचित नियमों अथवा दिशानिर्देशों के अनुसार भारत में अंतिम और बाध्यकारी माध्यस्थम द्वारा विवाद के निपटान से सहमत है।”
“शिकायतकर्ता सहमत है कि डोमेन नाम का पंजीकरण, विवाद, अथवा विवाद के निपटान से संबंधित उसके दावे और उपचार पूर्णतया डोमेन-नाम धारक के विरुद्ध होंगे और वह .इन रजिस्ट्री, तथा इसके निर्देशकों अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों तथा विवाद की सुनवाई करने वाले मध्यस्थ के विरुद्ध उक्त सभी दावों और उपचारों को अधित्यक्त करता हूं।”
“शिकायतकर्ता, शिकायत दर्ज कर इस बात से सहमत है कि इस मामले में नियुक्त मध्यस्थ का निर्णय सार्वजनिक किया जाए और बिना प्रतिबंध के .इन रजिस्ट्री के अन्य प्रकाशनों सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए।”
“शिकायतकर्ता प्रमाणित करता है कि इस शिकायत में अंतर्विष्ट सूचना शिकायतकर्ता की संपूर्ण जानकारी के अनुसार पूर्ण और सही है, और यह शिकायत किसी अनुचित प्रयोजन यथा प्रतिवादी को परेशान करने इत्यादि के लिए प्रस्तुत नहीं की जा रही है।”
(x) विवादित डोमेन पर लागू नीति और किसी ट्रेडमार्क या सेवा चिह्नन पंजीकरण की प्रति जिस पर शिकायत आधारित है, सहित कोई दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य और ऐसे साक्ष्य को दर्शाने वाली अनुसूची संलग्न करें।
(ग) प्रत्येक डोमेन नाम से संबंधित विवाद हेतु अलग-अलग शिकायत दर्ज करनी अपेक्षित है।
4. (4) शिकायत की अधिसूचना
(क) .इन रजिस्ट्री निर्धारित शुल्क प्राप्त होने पर, शिकायत को तीन कार्यदिवसों के भीतर प्रतिवादी को भेजेगी, यदि यह विवाद निपटान नीति और प्रक्रिया नियमों के अनुसार है।
(ख) यदि .इन रजिस्ट्री पाती है कि शिकायत विवाद निपटान नीति और प्रक्रिया नियमों के अनुसार नहीं है तो यह तीन कार्यदिवसों के भीतर शिकायतकर्ता को चिह्निनत त्रुटियों को अधिसूचित करे। शिकायतकर्ता के पास पांच कार्यदिवस होंगे जिनके भीतर वह उक्त त्रुटियों को दूर कर सकता है और ऐसा न करने पर समान डोमेन नाम के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा अन्य शिकायत भेजने के पूर्वाग्रह के बगैर माध्यस्थम कार्यवाही प्रत्याह्त मानी जाएगी।
.इन रजिस्ट्री, त्रुटियां सही करने के पश्चात् शिकायत प्राप्त होने पर मध्यस्थों की सूची से एक मध्यस्थ की नियुक्ति करेगी तथा शिकायत और दस्तावेजों को प्रतिवादी को और मध्यस्थ को भेजेगी ताकि माध्यस्थम और सुलह अधिनियम, 1996, इसके अंतर्गत रचित नियमों, विवाद निपटान नीति और इसके अंतर्गत रचित नियमों के अनुसार विवाद का अधिनिर्णयन किया जा सके।
(ग) माध्यस्थम कार्यवाही के आरंभ की तिथि वह तिथि होगी जिसको मध्यस्थ इन प्रक्रिया नियमों के पैरा 5 (ग) के अंतर्गत विनिर्दिष्ट किए अनुसार प्रतिवादी को सूचना जारी करता है।
5. पैनल की नियुक्ति तथा निर्णय का समय
(क) .इन रजिस्ट्री मध्यस्थों और उनकी योग्यताओं की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूची का अनुरक्षण तथा प्रकाशन करेगी।
(ख) .इन रजिस्ट्री आपत्तियों, यदि कोई है, को दूर करने के पश्चात् शिकायत प्राप्ति के पांच कार्यदिवसों के भीतर .इन रजिस्ट्री की मध्यस्थों की सूची में से एक मध्यस्थ की नियुक्ति करेगी और उसे शिकायत तथा संलग्न दस्तावेजों को भेजेगी। इसके शुल्क का पूर्ण भुगतान शिकायतकर्ता द्वारा किया जाएगा।
(ग) एक बार मध्यस्थ की नियुक्ति होने पर .इन रजिस्ट्री नियुक्त मध्यस्थ के पक्षों को अधिसूचित करेगी। मध्यस्थ समुचित निर्णय देगा और इसकी एक प्रति तत्काल शिकायतकर्ता, प्रतिवादी और .इन रजिस्ट्री को भेजेगा। निर्णय माध्यस्थम कार्यवाही आरंभ होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर दिया जाए। अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में मध्यस्थ द्वारा यह अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। लेकिन, मध्यस्थ द्वारा ऐसे विस्तारण हेतु लिखित में कारण बताए जाएं।
शिकायत प्राप्ति से तीन दिनों के भीतर मध्यस्थ द्वारा प्रतिवादी को सूचना भेजी जाए।
(घ) मध्यस्थ द्वारा सुनिश्चित किया जाए कि सभी दस्तावेजों, उत्तरों, प्रत्युत्तरों, आवेदनों समय-समय पर पारित आदेशों की प्रति .इन रजिस्ट्री को इसके रिकॉर्ड हेतु और कार्यवाहियों में पारदर्शिता बनाए रखने हेतु तत्काल भेजी जाए।
6. निष्पक्षता और स्वतंत्रता
(i) मध्यस्थ हमेशा निष्पक्ष और स्वतंत्र होना चाहिए और उसे ऐसा ही रहना चाहिए तथा नियुक्ति स्वीकार करने से पूर्व .इन रजिस्ट्री को उस किसी भी परिस्थिति के अवगत कराना चाहिए जो मध्यस्थ की निष्पक्षता अथवा स्वतंत्रता के प्रति युक्तियुक्त संदेह उत्पन्न कर सकता है। यदि, माध्यस्थम कार्यवाही के दौरान किसी भी स्तर पर नई परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जो मध्यस्थ की निष्पक्षता और स्वतंत्रता के प्रति संदेह पैदा कर सकती हैं तो मध्यस्थ को ऐसी परिस्थितियों से .इन रजिस्ट्री को तत्काल अवगत कराना चाहिए। ऐसा होने पर .इन रजिस्ट्री का विवेकाधिकार होगा कि वह .इन रजिस्ट्री की मध्यस्थों की सूची में से प्रतिस्थापक मध्यस्थ की नियुक्ति करे।
(ii) मध्यस्थ की नियुक्ति के पश्चात् लेकिन निर्णय देने से पूर्व यदि मध्यस्थ की मृत्यु हो जाती है या वह कार्य करने में अक्षम हो जाता है या कार्य करने से इंकार कर देता है, .इन रजिस्ट्री किसी भी पक्ष द्वारा लिखित अनुरोध करने पर .इन रजिस्ट्री की मध्यस्थों की सूची से प्रतिस्थापक मध्यस्थ की नियुक्ति करेगी।
(iii) कोई भी पक्ष प्रश्नाधीन मध्यस्थ की नियुक्ति की सूचना-प्राप्ति की तिथि से 7 कैलेंडर दिवसों के भीतर .इन रजिस्ट्री से लिखित में अनुरोध कर उस मध्यस्थ की निष्पक्षता अथवा स्वतंत्रता को उन परिस्थितियों जिनसे संबंधित मध्यस्थ की निष्पक्षता या स्वतंत्रता के प्रति युक्तियुक्त संदेह उत्पन्न हो सकता है और तत्संबंधी विशिष्ट कारणों को बताते हुए, चुनौती दे सकता है। .इन रजिस्ट्री केवल अपने विवेकाधिकार से निर्णय करेगी कि क्या उक्त संदेह औचित्यपूर्ण हैं और यदि .इन रजिस्ट्री ऐसा पाती है तो .इन रजिस्ट्री उस मध्यस्थ को हटा सकती है जिसके विरुद्ध चुनौती दी गई और उक्त मध्यस्थ को .इन रजिस्ट्री की मध्यस्थों की सूची में से अन्य मध्यस्थ द्वारा प्रतिस्थापित कर सकती है।
7. पक्षों और मध्यस्थ के मध्य पत्राचार
कोई पक्ष या उसकी ओर से कोई अन्य मध्यस्थ से एकपक्षीय पत्राचार नहीं कर सकता। पक्ष और मध्यस्थ या पक्ष और .इन रजिस्ट्री के मध्य सभी प्रकार का पत्राचार इन प्रक्रिया नियमों में निर्धारित पद्धति के अनुसार किया जाएगा।
8. मध्यस्थ की सामान्य शाक्तियां
(क) मध्यस्थ द्वारा माध्यस्थम कार्यवाही इस प्रकार की जाए जैसा कि माध्यस्थम और सुलह अधिनियम, 1996, विवाद निपटान नीति, प्रक्रिया नियमों और किन्हीं उप कानूनों, इसके अंतगर्त रचित नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार उचित माना गया हो।
(ख) सभी मामलों में, मध्यस्थ यह सुनिश्चित करेगा कि पक्षों को समान समझा जाए और प्रत्येक पक्ष को उसका मामला रखने का समुचित अवसर दिया जाए।
(ग) प्रत्येक मध्यस्थ यह सुनिश्चित करेगा माध्यस्थम कार्यवाहियां पर्याप्त तेजी से की जाएं।
9. माध्यस्थम कार्यवाहियों की भाषा
(क) माध्यस्थम कार्यवाहियों की भाषा अंग्रेजी होगी।
(ख) अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भाषा में भेजे गए किन्हीं दस्तावेजों के साथ उनकी अंग्रेजी में अनुवाद की सत्यापित प्रति भी भेजी जाएगी।
10. व्यक्तिगत सुनवाई
किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत सुनवाई (टेली कॉन्फ्रेंस, वीडियो कॉन्फ्रेंस और वेब कॉन्फ्रेंस द्वारा सुनवाई सहित) नहीं होगी जब तक कि मध्यस्थ अपने विवेकाधिकार से और अपवाद-स्वरूप मामले के रूप में यह निर्धारित नहीं करता कि शिकायत का निर्णय करने के लिए इस प्रकार की सुनवाई आवश्यक है।
11. चूक
(क) यदि कोई पक्ष, अपवाद-स्वरूप परिस्थितियां न होने पर जैसा कि मध्यस्थ द्वारा केवल अपने विवेकाधिकार से निर्धारित किया गया है, इन प्रक्रिया नियमों या मध्यस्थ द्वारा स्थापित किसी भी समय-अवधि का अनुसरण नहीं करता तो मध्यस्थ द्वारा शिकायत का कानून के अनुसार निर्णय कर दिया जाएगा।
12. मध्यस्थ का निर्णय
(क) मध्यस्थ द्वारा शिकायत का निर्णय उसे भेजे गए कथनों और दस्तावेजों के आधार पर और माध्यस्थम और सुलह अधिनियम 1996, विवाद निपटान नीति, प्रक्रिया नियमों और किन्हीं उप-कानूनों, इसके अंतर्गत रचित नियमों और दिशानिर्देशों तथा कोई अन्य कानून जो मध्यस्थ लागू करने योग्य मानता है, के अनुसार किया जाएगा।
(ख) मध्यस्थ का निर्णय लिखित में होगा, इसमें उन कारणों का उल्लेख होगा जिन पर यह आधारित है, उस तिथि को दर्शाया जाएगा जिसको निर्णय दिया गया और मध्यस्थ का नाम दिया जाएगा।
13. निर्णय के बारे में पक्षों को जानकारी देना
(क) मध्यस्थ से निर्णय प्राप्त होने के पश्चात् पांच कार्यदिवसों के भीतर .इन रजिस्ट्री द्वारा प्रत्येक पक्ष को निर्णय का पूर्ण पाठ भेजा जाएगा और प्रत्येक पक्ष को निर्णय के कार्यान्वयन की तिथि से भी अवगत कराया जाएगा।
14. समाप्ति हेतु समझौता या अन्य आधार
(क) यदि, मध्यस्थ के निर्णय से पूर्व, दोनों पक्ष समझौते के लिए सहमत हो जाते हैं तो मध्यस्थ, माध्यस्थम कार्यवाही समाप्त कर देता है और मध्यस्थ के निर्णय के रूप में समझौते की प्रविष्टि कर देता है।
15. शुल्क
(क) शिकायतकर्ता द्वारा .इन रजिस्ट्री को निर्धारित शुल्क का भुगतान .इन रजिस्ट्री की शुल्क-अनुसूची के अनुसार समय के भीतर और अपेक्षित धनराशि में किया जाएगा। .इन रजिस्ट्री प्रशासन प्रभार और मध्यस्थ की फीस का भुगतान करने हेतु सभी चेक / ड्राफ्ट ‘नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया’ के पक्ष में बनाए जाएंगे।
(ख) .इन रजिस्ट्री द्वारा शिकायत पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक कि इसे शिकायतकर्ता से निर्धारित शुल्क प्राप्त नहीं होता।
(ग) विवाद के अधिनिर्णयन हेतु शुल्क का निम्नवत् अनुसूची के अनुसार भुगतान किया जाए। यदि मध्यस्थ द्वारा व्यक्तिगत सुनवाई की जाती है तो व्यक्तिगत सुनवाई हेतु शुल्क दोनों पक्षों में समान रूप से बांटा जाएगा। तथापि यदि कोई पक्ष व्यक्तिगत सुनवाई हेतु अनुरोध करता है और मध्यस्थ द्वारा उस अनुरोध को मान लिया जाता है तो व्यक्तिगत सुनवाई हेतु शुल्क का भुगतान उक्त अनुरोध करने वाले पक्ष द्वारा किया जाएगा।
.इन रजिस्ट्री का
प्रशासन शुल्क
रु. 1000 / -
मध्यस्थ की फीस
रु. 9000 / -
व्यक्तिगत सुनवाई हेतु
रु. 2000 / - प्रति सुनवाई अधिकतम दो सुनवाई
(घ) यदि माध्यस्थम कार्यवाहियां प्रत्याह्त की जाती हैं जैसा कि उक्त पैरा 4 (ख) में विनिर्दिष्ट है, तो रजिस्ट्री प्रशासन शुल्क .इन रजिस्ट्री द्वारा जब्त कर लिया जाएगा।
(ङ) इस नीति के अनुसार .इन रजिस्ट्री में जमा किए गए किसी भी प्रकार के धन के संबंध में रजिस्ट्री द्वारा ब्याज, चाहे कितना भी हो, का भुगतान नहीं किया जाएगा।
(च) व्यक्तिगत सुनवाई का स्थल मध्यस्थ का अधिसूचित पता होगा।
16. दायित्व का अपवर्जन
न तो .इन रजिस्ट्री और न ही मध्यस्थ इन प्रक्रिया नियमों के अंतर्गत किसी माध्यस्थम कार्यवाही के संबंध में किसी कार्य अथवा उद्देश्य हेतु किसी पक्ष के प्रति उत्तरदायी नहीं होंगे।
17. संशोधन
.इन रजिस्ट्री में शिकायत भेजने के समय विवाद निपटान नीति और इन प्रक्रिया नियमों का प्रभावी संस्करण उक्त विवाद निपटान नीति और प्रक्रिया नियमों के अनुसार आरंभ की गई माध्यस्थम कार्यवाही पर लागू होगा।
.इन रजिस्ट्री द्वारा केवल अपने विवेकाधिकार से समय-समय पर इन प्रक्रिया नियमों में संशोधन किया जाए।
